आज के समय में हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, तनाव, गलत खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण हार्ट से जुड़ी समस्याएँ अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रहीं। ऐसे में इलाज की आधुनिक तकनीकों की जानकारी होना आम लोगों के लिए बेहद ज़रूरी है। इन्हीं आधुनिक तकनीकों में से एक है मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी, जो पारंपरिक हार्ट सर्जरी का एक उन्नत और सुरक्षित विकल्प मानी जा रही है।
मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी क्या होती है?
अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी आखिर होती क्या है?
यह एक ऐसी आधुनिक हार्ट सर्जरी तकनीक है, जिसमें छाती को पूरा खोलने की आवश्यकता नहीं होती। पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी में जहाँ छाती की हड्डी काटनी पड़ती है, वहीं इस तकनीक में केवल छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं। इन्हीं छोटे रास्तों से विशेष उपकरणों और कैमरे की मदद से सर्जरी की जाती है।
डॉ. सुधांशु जे. अग्निहोत्री के अनुसार, इस तकनीक का उद्देश्य मरीज को कम दर्द, कम जटिलताओं और तेज़ रिकवरी के साथ बेहतर परिणाम देना है।
यह सर्जरी कैसे काम करती है?
मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी में सर्जन अत्याधुनिक तकनीक और हाई-डेफिनिशन कैमरे की सहायता लेते हैं। ये कैमरे हार्ट की अंदरूनी संरचना को स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से दिखाते हैं, जिससे सर्जरी अत्यंत सटीक तरीके से की जा सकती है।
इस प्रक्रिया में ब्लड लॉस कम होता है और आसपास के टिशू को भी कम नुकसान पहुँचता है।
किन हार्ट समस्याओं में यह सर्जरी की जाती है?
“क्या हर हार्ट मरीज के लिए मिनिमली इनवेसिव सर्जरी संभव है?”
इसका उत्तर है—हर मरीज के लिए नहीं, लेकिन कई स्थितियों में यह बेहद प्रभावी होती है, जैसे:
- हार्ट वाल्व की समस्या
- कुछ प्रकार की जन्मजात हृदय बीमारियाँ
- कोरोनरी आर्टरी डिजीज के चुनिंदा मामले
- एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD)
मरीज की उम्र, बीमारी की गंभीरता और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को देखकर डॉक्टर यह तय करते हैं कि मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी उपयुक्त है या नहीं।
मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी के प्रमुख फायदे
इस तकनीक को लेकर लोगों की रुचि बढ़ने का सबसे बड़ा कारण इसके फायदे हैं:
- कम दर्द और कम चीरा
छोटे चीरे होने से दर्द अपेक्षाकृत कम होता है और मरीज जल्दी सहज महसूस करता है। - तेज़ रिकवरी
ओपन हार्ट सर्जरी की तुलना में मरीज कम समय में सामान्य जीवन में लौट सकता है। - कम इंफेक्शन का खतरा
छोटे घाव होने के कारण संक्रमण की संभावना भी कम हो जाती है। - खून का कम नुकसान
इस सर्जरी में ब्लड लॉस कम होता है, जिससे ट्रांसफ्यूजन की ज़रूरत भी घटती है। - कॉस्मेटिक लाभ
छोटे निशान होने से शरीर पर बड़े सर्जिकल मार्क्स नहीं रहते।
यही कारण है कि आज कई मरीज मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्या यह सर्जरी सुरक्षित है?
क्या न्यूनतम चीर-फाड़ वाली हृदय शल्य चिकित्सा सुरक्षित है?
डॉ. सुधांशु जे. अग्निहोत्री बताते हैं कि अनुभवी कार्डियक सर्जन और सही मेडिकल सेटअप में यह सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है। सही मरीज का चयन और आधुनिक तकनीक इसकी सफलता की कुंजी है।
सर्जरी के बाद रिकवरी कैसी होती है?
इस सर्जरी के बाद मरीज आमतौर पर जल्दी चलने-फिरने लगता है। ICU और अस्पताल में रहने की अवधि भी कम होती है। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएँ, लाइफस्टाइल में सुधार और नियमित फॉलो-अप से मरीज की रिकवरी और बेहतर हो जाती है।
यही वजह है कि मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी आज के समय में हार्ट ट्रीटमेंट का भविष्य कही जा रही है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर आपको या आपके किसी परिजन को बार-बार सीने में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक थकान, या हार्ट से जुड़ी कोई पुरानी समस्या है, तो देरी न करें। समय पर सही सलाह और आधुनिक उपचार जीवन बचा सकता है।
निष्कर्ष
हार्ट की सर्जरी का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है, लेकिन मेडिकल साइंस ने इस डर को काफी हद तक कम कर दिया है। मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी न केवल एक सुरक्षित विकल्प है, बल्कि यह मरीज को बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन भी प्रदान करती है। डॉ. सुधांशु जे. अग्निहोत्री जैसे अनुभवी कार्डियक सर्जन के मार्गदर्शन में यह तकनीक कई मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुकी है।

